घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न से जुड़े अधिकांश मामले; आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पुलिस और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के दिए निर्देश

देहरादून, 30 अक्टूबर। महिलाओं की समस्याओं की सुनवाई और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से शुक्रवार को देहरादून पुलिस लाइन सभागार में ‘राष्ट्रीय महिला आयोग, आपके द्वार’ अभियान के तहत महिला जनसुनवाई आयोजित की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में हुई इस जनसुनवाई में 25 से अधिक शिकायतें सामने आईं। इनमें अधिकांश मामले घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न से संबंधित थे।

जनसुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष ने पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनीं और पुलिस तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर पीड़िताओं को न्याय दिलाने के निर्देश दिए।

महिलाओं से चुप न रहने और शिकायत दर्ज कराने की अपील

विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं के प्रति हिंसा और उत्पीड़न किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। प्रत्येक महिला को सम्मान और समानता के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज परिवार, समाज, प्रशासन, शिक्षा और विज्ञान सहित हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ऐसे में महिलाओं के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव जरूरी है।

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी तरह की हिंसा, उत्पीड़न या संकट की स्थिति में चुप न रहें और उपलब्ध सहायता सेवाओं का इस्तेमाल करते हुए अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए शिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करना जरूरी है।

इन हेल्पलाइन नंबरों पर ले सकती हैं मदद

आयोग की अध्यक्ष ने महिलाओं को विभिन्न सहायता सेवाओं और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में पुलिस सहायता के लिए 112 और महिला हेल्पलाइन के लिए 181 पर संपर्क किया जा सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग की काउंसलिंग हेल्पलाइन 14490 के माध्यम से भी महिलाओं को परामर्श और मार्गदर्शन दिया जाता है।

जनसुनवाई में बताई गई अन्य हेल्पलाइन सेवाएं इस प्रकार हैं:

  • 112: आपातकालीन पुलिस सहायता
  • 181: महिला हेल्पलाइन
  • 14490: राष्ट्रीय महिला आयोग की काउंसलिंग हेल्पलाइन
  • 1091: महिला सुरक्षा हेल्पलाइन
  • 1098: चाइल्ड हेल्पलाइन
  • 1930: साइबर अपराध हेल्पलाइन
  • 7827170170: राष्ट्रीय महिला आयोग की 24×7 हेल्पलाइन

सुरक्षा से जुड़े ऐप की भी दी जानकारी

कार्यक्रम में महिलाओं को सुरक्षा और सहायता के लिए उपलब्ध ऐप की जानकारी भी दी गई। वन स्टॉप सेंटर ऐप के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी मिलती है। वहीं, 112 ऐप आपातकालीन सहायता प्रणाली से जुड़ा है।

इसके अलावा रक्षा ऐप के बारे में बताया गया कि आपात स्थिति में एक बटन दबाकर महिला अपनी लोकेशन परिजनों और करीबी लोगों के साथ साझा कर सकती है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता मिल सके।

जनसुनवाई में कई अधिकारी रहे मौजूद

विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। महिला उत्पीड़न के मामलों में परिवार, समाज, पुलिस और संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पीड़िता को सुरक्षित वातावरण मिले और उसे न्याय दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं।

कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, पुलिस महानिरीक्षक निलेश भरणे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून परमेंद्र डोभाल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलूनी, बाल कल्याण समिति और वन स्टॉप सेंटर की अधीक्षिकाओं सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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