धर्मनगरी Haridwar में गुरुवार को Ganga Saptami का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। मां गंगा के अवतरण दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस पावन अवसर पर तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की, वहीं शहर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।

हर की पैड़ी पर विशेष गंगा पूजन

पावन Har Ki Pauri पर तीर्थ पुरोहित समाज ने परिवार सहित मां गंगा की विधि-विधान से पूजा की। श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के अनुसार गंगा में दूध, दही, पंचामृत, फल-फूल और छप्पन भोग अर्पित किए। पूरे वातावरण में “गंगा मैया की जय” के जयकारे गूंजते रहे।

पौराणिक मान्यता और महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। King Bhagirath की कठोर तपस्या के बाद गंगा पृथ्वी पर आईं, जिससे उनके पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हुआ।
कथाओं में Jahnu Rishi का भी उल्लेख मिलता है, जिनके कर्ण से पुनः प्रकट होने के कारण गंगा को “जाह्नवी” नाम भी मिला।

भव्य शोभायात्रा ने बढ़ाई रौनक

गंगा सप्तमी के अवसर पर कुशावर्त घाट से गंगा जन्मोत्सव मंडल और तीर्थ पुरोहित समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सजी-धजी झांकियों, बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

शहर के प्रमुख बाजारों से गुजरती इस शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने तीर्थ पुरोहितों का अभिनंदन कर अपनी आस्था प्रकट की।

आस्था और आजीविका का संगम

हरिद्वार में मां गंगा केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार भी हैं। यही कारण है कि गंगा सप्तमी के अवसर पर तीर्थ पुरोहित, व्यापारी और आमजन मिलकर इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं।


यह पर्व एक बार फिर दर्शाता है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

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