देहरादून, 30 अप्रैल। ग्राफिक एरा के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पाक कला (Culinary Arts) के क्षेत्र में पूरे एशिया में अपनी तरह का एक अनोखा और नया रिकॉर्ड बना दिया है। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने महज़ 1 घंटा 28 मिनट के रिकॉर्ड समय में 554 अलग-अलग प्रकार के पराठे बनाकर ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के प्रतिनिधि श्री आनंद वेदांत की विशेष मौजूदगी में हासिल किया गया।

भोजन सिर्फ स्वाद नहीं, राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि भारत की कृषि विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, “भोजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक भी है।” इस आयोजन में बनाए गए पराठों ने भारत की समृद्ध खाद्य परंपरा को एक जीवंत और नवाचारी उत्सव में बदल दिया।

उत्तराखंड के गहत से लेकर मावा-गुलकंद की मिठास तक (विविधता से भरे स्वाद)

इस रिकॉर्ड की सबसे खास बात पराठों की वह विशाल वैरायटी रही, जिसने हर राज्य और स्वाद को एक मंच पर ला दिया:

  • पहाड़ी स्वाद: उत्तराखंड की गहत दाल, चैंसू, झंगोरा और काफुली की पौष्टिकता से भरपूर पराठे।
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय स्वाद: पनीर, सत्तू, मटर और मूली के पारंपरिक पराठे।
  • मीठे पराठे (Sweet Delights): मावा-गुलकंद, केला-गुड़ और रसोगुल्ला पराठे।
  • नवाचारी (Innovative) प्रयोग: इमली-प्याज, गुड़-तिल और चना भाजी जैसे बेहतरीन देसी जायके।
  • मांसाहारी विकल्प: फिश, कोषा मंग्शो (Kosha Mangsho) जैसे विशेष पराठे।
  • अन्य वैरायटी: स्प्राउट्स, टोफू और ड्राई फ्रूट्स के पराठे।

आधुनिक सेहत और पोषण का रखा गया विशेष ध्यान

स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति आधुनिक नजरिए को भी इन पराठों में शामिल किया गया।

  • हेल्थ फ्रेंडली: ग्लूटेन-फ्री (Gluten-free), डायबिटिक-फ्रेंडली, मल्टीग्रेन और हाई-फाइबर पराठे बनाए गए।
  • रंग-बिरंगे पौष्टिक पराठे: चुकंदर, पालक और हल्दी के प्राकृतिक रंगों और गुणों से सजे पराठे।

हॉस्पिटैलिटी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अमर डबराल ने बताया कि इन पराठों को तैयार करने में सिर्फ जायके और प्रस्तुतीकरण पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि पौष्टिकता और विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति को भी गहराई से जोड़ा गया। वहीं, विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रविश कुकरेती ने जानकारी दी कि इन पराठों को तैयार करने से पहले विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित पराठों के प्रकार और सामग्री पर गहन शोध किया गया था। इस प्रक्रिया में ‘पर्पल पोटैटो’ (Purple Potato) और ‘फॉक्सटेल मिलेट्स’ (कंगनी) जैसे अनूठे और पौष्टिक तत्वों का भी सफल प्रयोग किया गया।

युवा ऊर्जा और टीमवर्क का शानदार उत्सव

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने इस नए कीर्तिमान पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि महज़ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, पाक कला के क्षेत्र में नवीनतम प्रयोगों और हमारी युवा ऊर्जा का एक शानदार उत्सव है।” डॉ. घनशाला ने छात्रों और शिक्षकों के जोश, अनुशासन और अद्भुत टीमवर्क को पूरे संस्थान के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया।

कुलपति को मिला मेडल और आधिकारिक प्रमाणपत्र

इस पूरे आयोजन की निगरानी के लिए ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के प्रतिनिधि श्री आनंद वेदांत विशेष रूप से उपस्थित रहे। 1 घंटे 28 मिनट में 554 पराठों का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, उन्होंने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की तरफ से कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह को मेडल और आधिकारिक प्रमाणपत्र भेंट कर सम्मानित किया।

पहले भी बन चुके हैं कई विश्व रिकॉर्ड

आपको बता दें कि ग्राफिक एरा का हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट अपने नवाचारों के लिए देशभर में जाना जाता है। इस नए कीर्तिमान से पहले भी यह विभाग दो ‘गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness World Records) और पांच ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ (Limca Book of Records) अपने नाम दर्ज करा चुका है।

इन जांबाजों की टीम ने रचा इतिहास

इस कीर्तिमान को रचने वाली टीम का उत्साहवर्धन करने के लिए प्रो. वीसी डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, डीन ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स डॉ. डी.आर. गंगोडकर और डॉ. राकेश दानी मौजूद रहे।

रिकॉर्ड बनाने वाली टीम:

  • शिक्षक टीम: मोहसिन खान, सुनील लाल, विवेक रावत और योगेश उप्रेती।
  • छात्रों की टीम: चिंटू, आयुष राणा, ज्यूड, अविनाश गुरुंग, क्लीयो, अमान मंसूरी, समीक्षा, दीपेश पुन, प्रणव, आशुतोष, अनुष्का, चैतन्य, संतोष, पलक, निशांत, भूपेंद्र, लोकेश, गौरव, प्रियांशु, करण, महक और मयंक।

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