हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

स्थानीय जरूरतों के आधार पर बनें विकास की योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से शुरू जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि योजनाओं में स्थानीय जरूरतों, जनसुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए।

सीएम ने कहा कि प्रत्येक पंचायत को अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करने चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।

56 हजार से ज्यादा पंचायत प्रतिनिधियों को दिया गया प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 पंचायत भवनों की मरम्मत की गई है। वहीं एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है।

‘पंचायत का पैसा जनता का पैसा’, पारदर्शिता पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।

उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विकास कार्यों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका वास्तविक प्रभाव महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों के माध्यम से ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा।

स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।

विकासखंड स्तर पर भी इस कार्य के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन कम करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित कई कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही गांवों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

पंचायतों के जरिए योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने पर जोर

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास से जुड़ी अनेक योजनाएं पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों तक पहुंचती हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बदलाव आएगा। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधान और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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