देहरादून, 22 जुलाई 2026। उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के राजकीयकरण की मांग को लेकर पिछले 16 दिनों से मुख्यालय में चल रहा उत्तराखण्ड जल संस्थान अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सरकार और शासन की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन को आगामी आदेश तक रोकने का निर्णय लिया। हालांकि संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि सरकार के निर्णय की प्रतीक्षा में केवल स्थगित किया गया है। यदि मांगों के अनुरूप निर्णय नहीं हुआ तो पहले से अधिक व्यापक और मजबूत आंदोलन शुरू किया जाएगा।
16वें दिन भी जारी रहा कर्मचारियों का प्रदर्शन
धरने के 16वें दिन टिहरी जनपद से बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी धरना स्थल पहुंचे। इस दौरान टीकाराम रतूड़ी, संजय नेगी, लक्ष्मण सिंह पंवार, जयपाल सिंह रावत, अनिल भट्ट और जितेन्द्र सकलानी सहित कई कर्मचारियों ने आंदोलन में भाग लिया।
कर्मचारियों ने कहा कि उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के राजकीयकरण की मांग लंबे समय से लंबित है और अब इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
सरकार और कर्मचारियों के बीच हुई अहम वार्ता
आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि एवं उत्तराखण्ड पिछड़ा राज्य कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री स्तर) अशोक वर्मा तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की अपर सचिव झरना कमठान धरना स्थल पहुंचे और संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत वार्ता की।
बैठक में कर्मचारियों की ओर से राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रकाश रणाकोटी, मुख्य संयोजक नन्दलाल जोशी, मोर्चा के सलाहकार गजेन्द्र कुमार कपिल, जयपाल सिंह चौहान तथा उत्तराखण्ड जल संस्थान डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के प्रदेश महासचिव यशवंत सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
22 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण बैठक
वार्ता के दौरान अपर सचिव झरना कमठान ने बताया कि उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के राजकीयकरण के संबंध में 22 जुलाई 2026 को सचिव, पेयजल की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनके मांगपत्र पर शासन स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए पूरा पक्ष रखा जाएगा तथा मांगों के संबंध में त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी आधार पर कर्मचारियों से धरना स्थगित करने का अनुरोध किया गया।
मुख्यमंत्री प्रतिनिधि ने दिया भरोसा
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि अशोक वर्मा ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में उनके हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों से सरकार पर विश्वास बनाए रखने की अपील भी की।
सर्वसम्मति से आंदोलन स्थगित करने का निर्णय
वार्ता के बाद संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक नन्दलाल जोशी ने कर्मचारियों को सरकार के साथ हुई बातचीत की पूरी जानकारी दी। लंबी चर्चा के बाद सभी कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को आगामी आदेश तक स्थगित करने का निर्णय लिया।
संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन के सफल संचालन और सरकार तथा शासन के साथ सकारात्मक वार्ता कराने में सहयोग देने वाले सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों का आभार भी व्यक्त किया।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर होगा बड़ा आंदोलन
संयुक्त मोर्चा के सलाहकार गजेन्द्र कुमार कपिल ने कहा कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पर विश्वास रखना चाहिए, लेकिन यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों के अनुरूप निर्णय लेने में विफल रहती है तो संयुक्त मोर्चा पहले से अधिक मजबूती, एकजुटता और व्यापक समर्थन के साथ पुनः आंदोलन शुरू करेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धरना समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि केवल अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है।
