देहरादून। उत्तराखंड की शांत मानी जाने वाली राजधानी देहरादून में 17 साल बाद एनकाउंटर की गूंज सुनाई दी है। थाना प्रेमनगर क्षेत्र में जानलेवा हमला कर लूटपाट करने वाले बदमाशों और पुलिस के बीच बुधवार रात आमने-सामने की मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में एक शातिर बदमाश पुलिस की गोली का शिकार होकर मारा गया, जबकि थाना प्रेमनगर प्रभारी नरेश राठौड़ गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल थाना प्रभारी की हालत स्थिर है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

आईजी (गढ़वाल) राजीव स्वरूप और एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी।

कैसे शुरू हुआ घटनाक्रम: ठेकेदार की हिम्मत ने बिगाड़ा बदमाशों का खेल

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, बुधवार (29 अप्रैल) रात करीब 10:30 बजे पौंधा इलाके में ठेकेदार देवराज अपना काम खत्म कर घर लौट रहे थे।

  • रास्ते में घात लगाए बैठे तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और तमंचे के बल पर उनके पास मौजूद 2 लाख रुपये से भरा बैग छीनने की कोशिश की।
  • जब देवराज ने बैग देने से इनकार कर विरोध किया, तो बदमाशों ने उन पर फायर झोंक दिया। गोली ठेकेदार की पीठ में लगी।
  • गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद देवराज ने गजब की हिम्मत दिखाई और तुरंत डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दे दी।

मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी: दोनों तरफ से चले 10 राउंड फायर

सूचना मिलते ही प्रेमनगर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने सबसे पहले घायल ठेकेदार को अस्पताल भिजवाया और इलाके की घेराबंदी कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी। घेराबंदी के दौरान पुलिस का सामना भाग रहे बदमाशों से हो गया। खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में दोनों ओर से करीब 10 राउंड फायरिंग हुई।

  • बदमाशों की एक गोली थाना प्रेमनगर प्रभारी नरेश राठौड़ को लगी।
  • पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा, जबकि उसके दो अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
  • पुलिस सभी घायलों को प्राथमिक इलाज के लिए प्रेमनगर अस्पताल ले गई, जहां से उन्हें हायर सेंटर (कोरोनेशन अस्पताल) रेफर किया गया। इलाज के दौरान घायल बदमाश ने दम तोड़ दिया।

कौन था मारा गया बदमाश अकरम? (आपराधिक कुंडली)

घटनास्थल पर एफएसएल (FSL) की टीम ने साक्ष्य जुटाए। मारे गए बदमाश के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसकी एसओजी (SOG) और साइबर सेल से जांच कराने पर उसकी असली पहचान सामने आई। मारा गया बदमाश अकरम (निवासी शामली, उत्तर प्रदेश) था।

  • अंकित हत्याकांड का मुख्य आरोपी: अकरम ने साल 2014 में बालावाला क्षेत्र में अपने साथियों के साथ एक घर में डकैती डाली थी। इस दौरान परिवार को बंधक बनाकर एक युवक (अंकित) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और लाखों की नकदी-जेवर लूटे गए थे।
  • 14 संगीन मुकदमे: अकरम पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हत्या, लूट और डकैती के 14 मुकदमे दर्ज थे।
  • इनामी अपराधी: बालावाला हत्याकांड के बाद से फरार अकरम पर देहरादून पुलिस ने 50 हजार रुपये और शामली पुलिस (लूट के मामले में) ने 5 हजार रुपये का इनाम रखा था।
  • हालिया क्राइम रिकॉर्ड: अकरम 2017 में अवैध हथियारों के साथ दून पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। वह 2024 और 2025 में भी पटेलनगर और क्लेमेंटटाउन से चोरी के मामलों में जेल जा चुका था। पुलिस के अनुसार, अकरम कोर्ट की तारीख पर पेशी के लिए देहरादून आया था और इसी दौरान उसने अपने साथियों के साथ लूट की यह साजिश रची।

पुलिस की बड़ी कामयाबी: लूटा गया 100 प्रतिशत माल बरामद

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि पुलिस ने मौके से एक देशी पिस्टल, एक देसी तमंचा और ठेकेदार से लूटा गया पैसों का बैग (शत-प्रतिशत माल) बरामद कर लिया है। अस्पताल में भर्ती घायल ठेकेदार देवराज और उनके परिवार ने समय पर पहुंचकर जान बचाने के लिए देहरादून पुलिस और विशेषकर इंस्पेक्टर नरेश राठौड़ का आभार व्यक्त किया है। फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और शामली के पुलिस अधीक्षक को भी घटना की सूचना दे दी गई है।

फ्लैशबैक: 17 साल बाद फिर याद आया ‘रणवीर एनकाउंटर’

गौरतलब है कि देहरादून में पूरे 17 साल बाद पुलिस का कोई ऐसा बड़ा एनकाउंटर हुआ है। इससे पहले 3 जुलाई 2009 को देहरादून के लाडपुर के जंगलों में बहुचर्चित ‘रणवीर एनकाउंटर’ हुआ था। उस कथित फर्जी मुठभेड़ में पुलिस द्वारा 29 राउंड फायरिंग का दावा किया गया था, जिस पर काफी विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। अब 17 साल बाद हुए इस ताज़ा एनकाउंटर ने दून पुलिस की सक्रियता को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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