देहरादून। दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और जरूरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन की ओर से आयोजित विशेष शिविरों में 150 लोगों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। अक्टूबर में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लगाए गए चार शिविरों में स्वास्थ्य परीक्षण के साथ यूडीआईडी कार्ड के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और सहायक उपकरणों के लिए पात्र लोगों का चिह्नीकरण भी किया गया।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की पहल पर आयोजित इन शिविरों की जानकारी देते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिडियाल ने बताया कि अक्टूबर में चार स्थानों पर विशेष शिविर लगाए गए।
चार शिविरों में जारी हुए प्रमाण पत्र
शिविरों में जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों का विवरण इस प्रकार है:
- 21 अक्टूबर: गांधी शताब्दी अस्पताल, रायपुर विकासखंड में 31 दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र जारी किए गए।
- 22 अक्टूबर: डोईवाला विकासखंड परिसर में 39 लोगों को प्रमाण पत्र मिले।
- 23 अक्टूबर: राजकीय इंटर कॉलेज मेहूंवाला परिसर, शिमला बाईपास में 26 दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र जारी किए गए।
- 26 अक्टूबर: रियांश रिजॉर्ट, शिमला बाईपास रोड, सींगनिवाला के समीप शेरपुर में 54 लोगों को प्रमाण पत्र दिए गए।
इस तरह चारों शिविरों में कुल 150 दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र जारी किए गए।
सहायक उपकरणों के लिए पात्रों की पहचान
जिला समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार, शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग और जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से किया गया। यहां दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दिव्यांगता की जांच की गई और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी किए गए।
इसके अलावा प्रधानमंत्री दिव्यांग सहायता केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण के बाद पात्र दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया। यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
ऐसे जारी होता है दिव्यांगता प्रमाण पत्र
दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदकों को यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसके बाद संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है। चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार, विशेष शिविरों का उद्देश्य दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सुविधाओं से जोड़ना है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत मिल सके।
