देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के तबादले एक बार फिर उलझन भरी प्रक्रिया बन गए हैं। लंबे समय से लंबित ट्रांसफर-पोस्टिंग इस बार भी अंतिम चरण तक पहुंचकर अटक गई, जिससे अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और वन विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने लगा है।

दरअसल, IFS अधिकारियों के तबादले आमतौर पर सिविल सर्विस बोर्ड की सिफारिश और मंजूरी के बाद ही लागू किए जाते हैं। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक होती है, जिसमें अधिकारियों की नई तैनाती पर अंतिम निर्णय लिया जाता है। हालांकि, इस बार तमाम तैयारियों और चर्चाओं के बावजूद सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

अंतिम समय में अटकी प्रक्रिया

सूत्रों के मुताबिक, विभागीय स्तर पर तबादला सूची लगभग तैयार कर ली गई थी और कई अधिकारियों के नाम भी प्रस्तावित सूची में शामिल कर लिए गए थे। मंगलवार शाम को सचिवालय में आयोजित बैठक से उम्मीद थी कि इस बार सूची को मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन एक बार फिर अंतिम मुहर नहीं लग पाई।

यह पहला मौका नहीं है जब यह प्रक्रिया अटकी हो। इससे पहले भी बैठक तय होने के बावजूद नहीं हो सकी थी, जिससे मामला और ज्यादा पेचीदा हो गया है।

वन विभाग के कामकाज पर असर

इस देरी का सीधा असर वन विभाग के कामकाज पर पड़ रहा है। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में फॉरेस्ट फायर सीजन चल रहा है, विभाग के लिए यह बेहद संवेदनशील दौर होता है।

कई पदों पर अभी अतिरिक्त प्रभार के आधार पर काम चल रहा है, जबकि कुछ अधिकारी स्थायी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। इससे विभागीय कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।

अधिकारियों में असमंजस

लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे अधिकारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है। लगातार टलती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार इसमें देरी क्यों हो रही है और कब तक यह सूची फाइनल होगी।

अब अगली बैठक पर नजर

फिलहाल, सभी की नजरें अगली सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक पर टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द नई तारीख तय होगी और लंबे समय से अटकी इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed