देहरादून, 8 सितंबर। जिले में जर्जर और संभावित रूप से असुरक्षित भवनों को लेकर प्रशासन ने गंभीरता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मंगलवार देर शाम वर्चुअल बैठक कर जिलेभर में ऐसे भवनों के चिन्हीकरण और तकनीकी परीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भवन को जर्जर या गिरासू घोषित करने से पहले उसके तकनीकी और संरचनात्मक पहलुओं की गहन जांच की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि भवनों की वास्तविक स्थिति का सही आकलन जरूरी है, ताकि जनसुरक्षा के लिहाज से समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को चिन्हीकरण की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

सभी क्षेत्रों में प्राथमिकता से होगा चिन्हीकरण

डीएम ने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों, नगर निगम और नगर पालिका परिषदों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों का प्राथमिकता के आधार पर चिन्हीकरण कराने को कहा। ऐसे भवनों की सूची तैयार करने के साथ उनकी वर्तमान स्थिति, संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि केवल भवन की बाहरी स्थिति के आधार पर उसे गिरासू घोषित न किया जाए, बल्कि तकनीकी जांच के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

विशेषज्ञ तकनीकी टीमें करेंगी जांच

जिलाधिकारी ने नगर निगम, नगर पालिका परिषदों, लोक निर्माण विभाग और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के अधिकारियों को जर्जर भवनों के निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के लिए विशेषज्ञ तकनीकी टीमें गठित करने के निर्देश दिए।

इन विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य भवनों की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना है, ताकि जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।

जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

डीएम ने कहा कि किसी भवन को गिरासू घोषित करने की कार्रवाई में सभी तकनीकी और विधिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संभावित दुर्घटना या जनहानि को रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने विशेष रूप से संवेदनशील और अत्यधिक जर्जर भवनों को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। आवश्यकता होने पर ऐसे भवनों के संबंध में तत्काल सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विभागों को आपसी समन्वय से कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी ने कहा कि जर्जर भवनों के चिन्हीकरण और तकनीकी परीक्षण का कार्य केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई को प्रभावी ढंग से पूरा करें।

वर्चुअल बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविंद्र ज्वान्ठा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढोंडियाल, उप जिलाधिकारी चकराता प्रेमलाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार समेत संबंधित विभागों के अधिकारी जुड़े रहे।

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