देहरादून। राजधानी देहरादून के रेंजर्स मैदान में 30वें ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि यह मेला केवल आयोजन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में दिव्यांगजनों की निर्णायक भूमिका का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में दिव्यांगजन महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी नवाचारों को दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों का माध्यम बताते हुए कहा कि तकनीक समान अवसर प्रदान करती है और प्रतिभा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम करती है।
₹375 करोड़ का बजट प्रावधान
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सहायक उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए 375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India के माध्यम से खर्च की जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
16 राज्यों से 100 से अधिक प्रतिभागी
देहरादून में आयोजित इस नौ दिवसीय मेले में देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी भाग ले रहे हैं। लगभग 90 स्टॉलों में हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने और उपहार सामग्री प्रदर्शित व बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
अब तक देश के 29 शहरों में आयोजित मेलों में 2362 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। रोजगार मेलों में 3131 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1007 शॉर्टलिस्ट हुए और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव मिले।
रोजगार मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम
26 फरवरी 2026 को विशेष रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा, जबकि 1 मार्च 2026 को ‘दिव्य कला शक्ति’ नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
21 फरवरी से 1 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलने वाले इस मेले में प्रवेश निःशुल्क है।
सामाजिक परिवर्तन का मंच
सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और विधायक खजान दास ने इस आयोजन को सामाजिक परिवर्तन और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला मंच बताया। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक प्रदीप ए. ने कहा कि यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को बाजार, वित्त और रोजगार से जोड़ने की दिशा में समग्र पहल है।
देहरादून में आयोजित यह मेला न केवल कला और उद्यमिता का उत्सव है, बल्कि समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत पहल भी है।
