देहरादून। देशभर में ई-फार्मेसी के विरोध में बुधवार को 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर उत्तराखंड में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। 19 मई की रात 12 बजे से शुरू हुई हड़ताल 20 मई की रात 12 बजे तक जारी रही, जिसके चलते प्रदेशभर में करीब 95 फीसदी मेडिकल स्टोर बंद रहे। राजधानी देहरादून सहित कई जिलों में दवा दुकानों पर ताले लटकने से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, हालांकि दवा व्यापारियों ने आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था भी बनाए रखी।
प्रदेश में करीब 11 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें से अधिकांश ने हड़ताल में हिस्सा लिया। देहरादून जिले में ही लगभग 98 फीसदी मेडिकल स्टोर बंद रहे। इस बंद का असर दवा कारोबार पर भी पड़ा और केवल देहरादून में करीब 12 करोड़ रुपये के कारोबार के प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है।
ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव का विरोध
दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री प्लेटफॉर्म तेजी से रिटेल और होलसेल मेडिकल कारोबार के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। उनका आरोप है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक मेडिकल व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं। साथ ही ऑनलाइन दवा बिक्री से दवाइयों की गुणवत्ता, मरीज की सुरक्षा और बिना चिकित्सकीय सलाह दवा उपलब्ध कराने जैसे गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन देहरादून के महासचिव आकाश प्रभाकर ने बताया कि हड़ताल का उद्देश्य सरकार तक दवा व्यापारियों की चिंता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव से छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रत्येक शहर में 5 से 6 मेडिकल स्टोर खुले रखे गए हैं। इन दुकानों के नंबर स्थानीय प्रशासन और आम जनता को भी उपलब्ध कराए गए हैं।
कोरोना काल के बाद बढ़ा ऑनलाइन दवा कारोबार
कोरोना महामारी के बाद देशभर में ई-कॉमर्स का चलन तेजी से बढ़ा है। लोगों ने घर बैठे दवाइयां मंगाना शुरू किया, जिससे ई-फार्मेसी कंपनियों को बड़ा विस्तार मिला। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सस्ती दरों और होम डिलीवरी की सुविधा मिलने से आम जनता भी तेजी से इस ओर आकर्षित हुई। हालांकि इसका सीधा असर पारंपरिक दवा व्यापारियों पर पड़ रहा है।
जरूरी सेवाएं रहीं जारी
हड़ताल के बावजूद जन औषधि केंद्र, अस्पतालों के अंदर संचालित फार्मेसी और कुछ आवश्यक मेडिकल स्टोर्स को बंद से बाहर रखा गया। ताकि गंभीर मरीजों और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि ई-फार्मेसी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और स्थानीय मेडिकल व्यापारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
