देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत प्रत्येक जिले में एक विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी, जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग, यातायात नियमों के उल्लंघन और अन्य जोखिमपूर्ण गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करेगी।
गृह विभाग की अपर सचिव तृप्ति भट्ट ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई राजस्थान के फलौदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए सड़क हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है।
एनएच की नियमित निगरानी करेंगे डीएम
नई एसओपी के तहत जिलाधिकारियों को समय-समय पर राष्ट्रीय राजमार्गों का निरीक्षण करने, सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में गठित टास्क फोर्स संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करेगी।
एटीएमएस से होगी निगरानी, स्वत: कटेंगे ई-चालान
एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को भेजे पत्र में बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के माध्यम से यातायात की निगरानी की जा रही है। इस प्रणाली से प्राप्त वीडियो फुटेज को ई-चालान और वाहन-परिवहन पोर्टल से जोड़ने की योजना है, जिससे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के स्वत: ई-चालान जारी किए जा सकेंगे।
चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ जाता है हादसों का खतरा
उत्तराखंड में मई, जून और जुलाई के महीने सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। इसी अवधि में चारधाम यात्रा चलने के कारण राज्य में वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। पर्वतीय सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी अधिक रहती है।
राज्य परिवहन विभाग के अनुसार सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में उत्तराखंड का औसत करीब 62 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 36 प्रतिशत है। वर्ष 2025 में राज्य में 1,846 सड़क दुर्घटनाओं में 1,242 लोगों की मौत हुई, जबकि 2,026 लोग घायल हुए।
मुख्य सचिव बोले- सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है और लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई एसओपी और जिला स्तरीय टास्क फोर्स सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
