देहरादून, 23 जुलाई 2026। देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नदी के उद्गम स्थल से ही इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। पहले चरण में बार्लोगंज से काठबंगला तक लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ और निर्मल नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि ऋषिपर्णा नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा अभियान होगा।
उद्गम क्षेत्र से शुरू होगा संरक्षण अभियान
बैठक में तय किया गया कि पहले चरण में नदी के ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में भू-जल पुनर्भरण, छोटे-छोटे चेकडैमों का निर्माण, व्यापक पौधरोपण, सौंदर्यीकरण और ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने और वर्षभर जल प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नदी पुनर्जीवन के लिए साबरमती नदी पुनर्जीवन परियोजना में कार्य कर चुकी विशेषज्ञ टीम का तकनीकी सहयोग लिया जाए। साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं, पर्यावरण मित्रों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।
स्वच्छता अभियान और चेकडैम निर्माण पर विशेष फोकस
बैठक में नगर पालिका मसूरी को लालटिब्बा से शिखर फॉल तक तथा नगर निगम देहरादून को काठबंगला से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। वहीं सिंचाई विभाग को चेकडैम निर्माण और नदी तटों के सुदृढ़ीकरण के लिए शीघ्र कंसल्टेंसी फर्म के साथ अनुबंध करने को कहा गया।
सीवर और कचरे को नदी में जाने से रोका जाएगा
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मैदानी क्षेत्रों में ऋषिपर्णा नदी में गिरने वाले सभी नालों और सीवर के दूषित जल का उपचार (ट्रीटमेंट) सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही नदी में पहुंचने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक और ठोस कचरे को रोकने के लिए नालों पर जालियां लगाकर कचरे का पृथक्करण किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान किए जाएं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नदी संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाए।
चिन्हित किए गए गारबेज प्वाइंट, डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जारी
बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, सिंचाई और वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और गारबेज प्वाइंट्स का चिन्हांकन पूरा कर लिया गया है। डंपिंग साइट के चयन के बाद बजट तैयार किया जा रहा है। वहीं नदी के ऊपरी क्षेत्र में चेकडैम निर्माण और तट संरक्षण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने तथा विशेषज्ञ एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी जारी है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, अधीक्षण अभियंता संजय राय सहित वन, सिंचाई, नगर निगम और नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
