देहरादून, 5 अगस्त। ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियाँ और सही जानकारी का अभाव कई बार माताओं के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का सहयोग तथा समय पर उचित परामर्श नवजात शिशु के स्वस्थ भविष्य के लिए बेहद आवश्यक है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज का बाल रोग विभाग सप्ताहभर विभिन्न जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संस्थान ने इस अभियान को केवल अस्पताल परिसर तक सीमित न रखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी पहुंचाया है, जहां लोगों को स्तनपान के महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नर्सिंग स्टाफ और भावी स्वास्थ्यकर्मियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एन.के. मोहिन्द्रू ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु के पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज की दिशा में सबसे प्रभावी कदमों में से एक है। उन्होंने कहा कि मां का दूध बच्चे के जीवनभर के अच्छे स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखता है और अनेक गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रूपा डालमिया सिंह ने कहा कि स्तनपान से जुड़ी गलत धारणाएँ और मिथक नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकते हैं। सही जानकारी, समय पर परामर्श और जागरूकता के माध्यम से इन भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नियमित स्तनपान से शिशु को बेहतर पोषण, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक विकास सुनिश्चित होता है।

विशेषज्ञों ने सभी माताओं और परिवारों से अपील की कि वे स्तनपान से जुड़े मिथकों पर विश्वास करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह का पालन करें, ताकि प्रत्येक नवजात को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिल सके।

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