देहरादून, 22 जुलाई 2026। राजधानी देहरादून के सुनियोजित, आधुनिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित विकास के लिए तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) का जनसंवाद अभियान अंतिम चरण में पहुंच गया है। अभियान के 12वें दिन सेक्टर-12 की जनसुनवाई चंद्रबनी रोड स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) सभागार में आयोजित की गई, जहां स्थानीय नागरिकों, भू-स्वामियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भविष्य के देहरादून को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।

जनसुनवाई के दौरान एमडीडीए के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने महायोजना-2041 के प्रस्तावित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। नागरिकों ने सड़क, यातायात, जल निकासी, हरित क्षेत्रों के संरक्षण, सार्वजनिक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव रखे। अधिकारियों ने सभी सुझावों का विधिवत अभिलेखीकरण करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रत्येक बिंदु का तकनीकी और विधिक परीक्षण कर अंतिम महायोजना में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

बढ़ते ट्रैफिक और आधारभूत सुविधाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

जनसुनवाई में नागरिकों ने चंद्रबनी, मोहकमपुर, शिमला बाईपास और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते यातायात दबाव पर चिंता व्यक्त की। लोगों ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क मजबूत करने, नए संपर्क मार्ग विकसित करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की मांग की।

इसके साथ ही पार्किंग सुविधाओं का विस्तार, जलापूर्ति, सीवरेज व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य शहरी सुविधाओं को महायोजना का प्रमुख हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया। नागरिकों का कहना था कि राजधानी का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता भी समान रूप से बेहतर होनी चाहिए।

हरित देहरादून की पहचान बचाने पर दिया गया जोर

जनसुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। प्रतिभागियों ने दून घाटी की हरियाली, प्राकृतिक जल स्रोतों, खुले सार्वजनिक स्थलों और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की।

वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान और हरित क्षेत्रों के विस्तार को महायोजना में प्राथमिकता देने पर भी व्यापक चर्चा हुई। नागरिकों ने कहा कि देहरादून की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन से है, इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार हो विकास मॉडल

भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग (Land Use) और विकास नियंत्रण नियमों को लेकर भी अपने सुझाव दिए। उनका कहना था कि प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए महायोजना तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

एमडीडीए अधिकारियों ने कहा कि सभी सुझावों और आपत्तियों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और व्यवहारिक तथा जनहितकारी सुझावों को अंतिम प्रारूप में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

जनभागीदारी से बनेगी मजबूत महायोजना

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राजधानी की विकास रूपरेखा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से मिल रहे सुझाव महायोजना को अधिक व्यवहारिक, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ऐसा देहरादून विकसित करना है जो आने वाले वर्षों में भी रहने योग्य और टिकाऊ शहर बना रहे। उन्होंने नागरिकों से आगे भी सक्रिय भागीदारी जारी रखने की अपील की।

हर सुझाव का होगा तकनीकी परीक्षण

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम सभी सुझावों का तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक परीक्षण करेगी।

उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। इसी सोच के साथ अंतिम महायोजना को तैयार किया जाएगा।

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