देहरादून, 09 जुलाई। उत्तराखंड में मौसम विभाग के रेड अलर्ट और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। आपदा की संभावनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार को स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने सहस्रधारा, कार्लीगढ़ और अति-संवेदनशील सपेरा बस्ती का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को राहत एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक निर्देश दिए।

सहस्रधारा-सरोना मार्ग चार स्थानों पर बाधित

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सबसे पहले सहस्रधारा-सरोना मोटर मार्ग पहुंचे, जहां भारी बारिश और मलबा आने के कारण मार्ग चार अलग-अलग स्थानों पर अवरुद्ध पाया गया। पीएमजीएसवाई अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में भी यह मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुआ था और स्थायी सुरक्षा कार्यों के अभाव में बार-बार बाधित हो रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने दोनों ओर से जेसीबी मशीनें लगाकर तत्काल मलबा हटाने और सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मार्ग के स्थायी ट्रीटमेंट और सुरक्षा कार्यों के लिए शासन स्तर पर भी पहल की जाएगी।

कार्लीगढ़ में नदी पार रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर जोर

कार्लीगढ़ क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग ने बताया कि नदी चैनलाइजेशन और मलबा निस्तारण का कार्य पूरा कर लिया गया है। हालांकि नदी के दूसरी ओर निवास कर रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

उन्होंने तहसील प्रशासन को आदेश दिए कि सभी प्रभावित परिवारों के पास पर्याप्त राशन, पेयजल और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही उनके मोबाइल नंबर जिला आपदा नियंत्रण कक्ष में दर्ज किए जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

सपेरा बस्ती में लोगों से सीधे संवाद

आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाने वाली सपेरा बस्ती में जिलाधिकारी ने स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने नाले के ट्रीटमेंट और क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारों की मरम्मत के लिए तत्काल कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

नगर निगम को निर्देशित किया गया कि असुरक्षित मकानों में रह रहे लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए और बारिश के दौरान चेतावनी प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए।

यमुना नदी खतरे के निशान पर

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार गुरुवार को जनपद में औसतन 25.75 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है, जबकि गंगा और टोंस नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।

भूस्खलन और मलबा आने के कारण हरिपुर-इच्छाड़ी-कुवानू-मीनास राज्य मार्ग तीन स्थानों पर अवरुद्ध है, जिसे शाम तक खोलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा जिले के 14 ग्रामीण मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें सुचारू करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी और सतर्कता बनाए रखें, ताकि जनहानि और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

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